Wednesday, 6 May 2015

देख लो.................












अभिमान से हुआ कोई काम देख लो                         
कंस, रावण सभी का परिणाम देख लो
अभिमान छोड्ना पडा जगदीश को यहां
मुरारी ने लिया रणछोड नाम देख लो

अन्तर्मन में था कोहराम देख लो
नेकी ओ बदी में था संग्राम देख लो
जीती नेकनियत बदी की हार हुई तो
शान्त हुआ चित पडा आराम देख लो

तिनका चुगते हंस से गुणवान देख लो
कौवे को मोतियों का सम्मान देख लो
क्या चाहा था क्या हो गया अब, अपने
जग की हालत करुणानिधान देख लो

खोखली सरकारो का निजाम देख लो
क्या खूब किया है इन्तजाम देख लो
इनके मुआवजे की राह तकते-तकते
किसान हुआ नीलाम सरेआम देख लो

पत्थर के इसांन और मकान देख लो
बिकने को ही है सारा सामान देख लो
रिश्ते भी हो गये कारोबार का जरिया
जहनो में चलती-फिरती दूकान देख लो

-जितेन्द्र तायल
 मोब. 9456590120

(स्वरचित) कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google इस ब्लॉग के अंतर्गत लिखित/प्रकाशित सभी सामग्रियों के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं। किसी भी लेख/कविता को कहीं और प्रयोग करने के लिए लेखक की अनुमति आवश्यक है। आप लेखक के नाम का प्रयोग किये बिना इसे कहीं भी प्रकाशित नहीं कर सकते। कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-05-2015) को "गूगल ब्लॉगर में आयी समस्या लाखों ब्लॉग ख़तरे में" {चर्चा अंक - 1969} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार नमन

      Delete
  3. Replies
    1. बहुत आभार नमन

      Delete
  4. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार आदरणीया

      Delete
  5. वाह .. लाजवाब है प्रस्तुति और भाव ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. उत्साह वर्धन के लिये हार्दिक आभार आदरणीय

      Delete
  6. सुन्दर अहसास लिए अच्छी रचना।

    ReplyDelete
    Replies
    1. सादर नमन आदरणीय

      Delete
  7. Replies
    1. उत्साहवर्धन के लिये हार्दिक आभार आदरणीय

      Delete